Atal Bihari Vajpayee Biography in hindi । भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन परिचय

Atal bihari vajpayee
Atal bihari vajpayee biography

Bharat Ratna Atal Bihari Vajpayee Biography in hindi

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न माननीय श्री अटल बिहारी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर के एक छोटे से गांव में हुआ था। अटल बिहारी बाजपेयी न केवल देश की सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहे बल्कि वे एक अच्छे पत्रकार के साथ की कवि भी थे। बड़ी से बड़ी बात को वे अपनी कविताओं के माध्यम से बेबाकी के साथ सामने रखते थे । वे भारतीय जनसंघ के राजनीतिक पार्टी के संस्थापक सदस्यों मे से एक थे। 25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयी जी (Atal Bihari Vajpayee) के जन्म दिवस के अवसर पर आईए जानते हैं, उनके जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें..

अटल बिहारी बाजपेयी चार दशक तक भारतीय संसद के सदस्य रहे हैं। वे लोकसभा मे दस बार, और राज्य सभा मे दो बार चुने गए थे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के रूप मे आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लिया था। वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पहले प्रधानमंत्री थे। उनके आजीवन विवाह नहीं करने के कारण उन्हें भारतीय राजनिति मे भीष्मपितामह भी कहा जाता है। उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मंत्री थे।

वर्ष 2005 से वे राजनीति से सन्यास ले चुके थे और नई दिल्ली के सरकारी आवास में रहते थे । 16 अगस्त 2018 को एक लंबी बीमारी के बाद उनका अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली मे निधन हो गया।

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Atal bihari Vajpayee प्रारंभिक जीवन

जन्म

अटल बिहारी बाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर मे पंडित कृष्ण बिहारी बाजपेयी और उनकी पत्नी कृष्णा बाजपेयी के यहाँ हुआ।

शिक्षा

अटल बिहारी बाजपेयी के पिता मध्यप्रदेश की ग्वालियर रियासत मे अध्यापक थे। साथ ही वे हिंदी एवं बृज भाषा के प्रसिद्ध कवि थे। अटल बिहारी बाजपेयी को काव्य गुण वंशानुगत प्राप्त हुआ था।  महात्मा रामचन्द्र वीर द्वारा रचित ”विजय पतक” पढ़कर बाजपेयी जी का जीवन ही बदल गया। अटल जी की बी.ए. की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई। छात्र जीवन से ही वे वाढ विवाद प्रतियोगिता मे भाग लेते रहे तथा स्वयंसेवक बने।

बाजपेयी जी राजनीति शास्त्र मे एम.ए. प्रथम श्रेणी से पास किया, एम.ए. की पढ़ाई कानपूर के डी.ए.व्ही. कॉलेज मे हुई। इसके उपरांत उन्होंने एल.एल. बी. की पढ़ाई भी चालू की लेकिन उसे बीच मे ही छोड़कर संघ के कार्य मे जुट गए।

राजनीतिक जीवन

बाजपेयी जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों मे से एक थे। साथ ही वे वर्ष 1968 से 1973 तक भारतीय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। वे वर्ष 1952 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़े, किंतु सफलता नहीं मिली। हार के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सन् 1957 में बलरामपुर ( उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल कर लोकसभा में पहुँचे। वे मोरार जी देसाई सरकार मे 1977 से 1979 तक विदेश मंत्री रहे।

1980 मे जनता पार्टी से असंतुष्ट होकर पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना मे मदद की। भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के बढ़ अध्यक्ष पद का दयित्ब भी इन्ही को सौंपा गया। भारतीय जनता पार्टी की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई। अटल बिहारी बाजपेयी को दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी वर्ष 1996 में प्रधानमंत्री बने, पुनः 19 अप्रैल 1998 को प्रधानमंत्री बने।

वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव मे भारतीय जनता पार्टी   के नेतृत्व वाला गठबंधन (NDS) बाजपेयी जी के नेतृत्व मे चुनाव लड़े। इस चुनाव मे किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। ऐसी स्तिथी मे कांग्रेस ने वामपंथी दलों के समर्थन से सरकार बनाने मे सफल हुई। इसके पश्चात बाजपेयी जी ने राजनीति से सन्यास ले लिया।

बाजपेयी जी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के महत्वपूर्ण कार्य

भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाना

पाकिस्तान से संबंधों में सुधार की पहल

कारगिल युद्ध

स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना

अन्य प्रमुख कार्य

लग्भग सौ वर्ष पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाना।

संरचनात्मक ढाँचे के लिये कार्यदल, सॉफ्टवेयर विकास के लिये सूचना एवं प्रौद्योगिकी कार्यदल, विद्युतीकरण में गति लाने के लिये केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग आदि का गठन करना।

राष्ट्रीय राजमार्गों एवं हवाई अड्डों का विकास; नई टेलीकॉम नीति तथा कोकण रेलवे की शुरुआत करके बुनियादी संरचनात्मक ढाँचे को मजबूत करने वाले कदम ।

राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति भी गठित करना।

आवश्यक उपभोक्ता सामग्रियों के मूल्योंं को नियन्त्रित करने के लिये मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन ।

उड़ीसा के सर्वाधिक निर्धन क्षेत्र के लिये सात सूत्रीय निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम शुरू करना।

आवास निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त करना।

ग्रामीण रोजगार सृजन एवं विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिये बीमा योजना शुरू करना।

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