Dr Salim Ali biography and interesting facts in hindi – डॉ सलीम अली की जीवनी और उनसे जुड़े रोचक तथ्य

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Birdman of india dr salim ali
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Dr Salim Ali biography and interesting facts in hindi – डॉ सलीम अली की जीवनी और उनसे जुड़े रोचक तथ्य

Dr Salim Ali Biography : डॉ सलीम अली एक भारतीय पक्षी विज्ञानी, वन्यजीव संरक्षणवादी और प्रकृतिवादी थे। डॉ अली का पूरा नाम सलीम मोइज़ुद्दीन अली है। डॉ सलीम अली ने सम्पूर्ण भारत में व्यवस्थित रूप से पक्षियों का सर्वेक्षण किया और पक्षियों पर ढेर सारे लेख और किताबें लिखीं और ऐसा करने वाले ये पहले पक्षी विज्ञानी थे। डॉ अली द्वारा लिखित पुस्तकों का भारत में पक्षी-विज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके पक्षियों के प्रति समर्पण और किये गए विशिष्ट कार्यों के कारण उन्हें “भारत का बर्डमैन” कहा जाता है। उनके कार्यों और योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें सन 1958 में पद्म भूषण और सन 1976 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है। सन 1947 के बाद वे ‘बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी’ के प्रमुख बने और ‘भरतपुर पक्षी अभयारण्य’ (केओलदेव् राष्ट्रिय उद्यान) के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साइलेंट वैली नेशनल पार्क को बर्बाद होने से बचाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। Dr Salim Ali biography and interesting facts in hindi – डॉ सलीम अली की जीवनी और उनसे जुड़े रोचक तथ्य। आइये जानते हैं, भारत के पक्षी विज्ञानी, वन्यजीव संरक्षणवादी और प्रकृतिवादी डॉ सलीम अली के जीवन से जुड़ी मुख्य बातें –

Birth of Dr Salim Ali (डॉ सलीम अली का जन्म)

डॉ सलीम अली का जन्म 12 नवम्बर 1896 को बॉम्बे (वर्तमान मुम्बई) मे पिता मोइज़ुद्दीन और माता ज़ीनत-उन-निस्सा के यहाँ हुआ था।

Life Of Salim Ali (डॉ सलीम अली का प्रारंभिक जीवन)

डॉ सलीम अली का जन्म बॉम्बे के एक सुलेमानी बोहरा मुस्लिम परिवार में 12 नवम्बर 1896 को हुआ था । डॉ अली अपने माता-पिता के सबसे छोटे क्रम मे नौंवे पुत्र थे। डॉ अली के माता एवं पिता का निधन काफी जल्दी हो गया, जब वे एक वर्ष के थे तब उनके पिता और तीन  वर्ष की आयु हुई तब उनकी माता जी का भी निधन हो गया।  पिता एवं माता के निधन के बाद उनकी तथा उनके भाई-बहनों की देख-रेख उनके मामा अमिरुद्दीन तैयाबजी और मामी हमिदा द्वारा की गई।

बालक सलीम अली के मन मे पक्षियों के प्रति जिज्ञासा तथा पक्षियों के अध्ययन के लिए उत्साह डबल्यू.एस. मिलार्ड ने बढ़ाया। डबल्यू.एस. मिल्लार्ड बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के सचिव थे। पक्षियों के प्रति जिज्ञासा होने तथा अध्ययन मे रूची बढ़ने पर सलीम ने गंभीर अध्ययन प्रारम्भ किया। मिल्लार्ड ने उनकी सोसायटी में संग्रहीत समस्त पक्षियों को सलीम को दिखाना प्रारंभ किया तथा पक्षियों के संग्रहण के लिए प्रोत्साहित भी किया। साथ ही वे सलीम को कुछ किताबें भी दिए जिसमें ‘कॉमन बर्ड्स ऑफ मुंबई’ भी शामिल थी। मिल्लार्ड ने ही युवा सलीम को नोर्मन बॉयड किनियर से मिलाया था, नोर्मन बॉयड किनियर जो कि बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी में प्रथम पेड क्यूरेटर थे।

सलीम और उनकी दो बहनों प्राथमिक शिक्षा गिरगाम स्थित ज़नाना बाइबिल मेडिकल मिशन गर्ल्स हाई स्कूल मे तथा बाद में उनका दाखिला मुंबई के सेंट जेविएर में कराया गया। 13 साल की आयु वे सिरदर्द की गंभीर बीमारी से पीड़ित हो गए, जिस कारण उन्हें बार बार  कक्षा छोड़ना पड़ता था। इसी दौरान किसी ने सुझाव दिया कि सिंध की शुष्क हवा उन्हें ठीक होने में मददगार हो सकती है। इस सुझाव पर सलीम को उनके एक चाचा के साथ रहने के लिए सिंध भेज दिया गया। वेब काफी वक्त बाद सिंध से वापस लौटे तथा बड़ी मुश्किल से वर्ष 1913 में बॉम्बे विश्वविद्यालय से दसवीं कक्षा उत्तीर्ण की।

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Dr. Salim Ali’s stay in Burma and Germany
(डॉ सलीम अली का बर्मा और जर्मनी में प्रवास)

सलीम अली की प्रारंभिक शिक्षा मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज मे हुई, किंतु कॉलेज के पहले वर्ष ही बीमारी के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी और परिवार के वोलफ्रेम (टंग्सटेन) माइनिंग और इमारती लकड़ियों के व्यापार की देख-रेख के लिए टेवोय, बर्मा (टेनासेरिम) चले गए। यह स्थान सलीम की पक्षियों तथा पक्षियों के अध्ययन सहायक सिद्ध हुआ क्योंकि यहाँ पर घने जंगले थे जहाँ इनका मन तरह-तरह के पक्षियों को देखने में लगता।

लगभग 7 साल बाद सलीम अली मुंबई वापस हुए। मुंबई वापस आने के बाद वे पक्षी शास्त्री विषय में प्रशिक्षण प्राप्त किये तथा बंबई के ‘नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी’ के म्यूज़ियम में गाइड के पद पर नियुक्त हो गये। कुछ समय उपरांत इस कार्य में उनका मन नहीं लगा तो वे अवकास लेकर जर्मनी चले गए। जर्मनी मे उन्होंने पक्षी विज्ञान में उच्च प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद भारत वापस आने पर पता चला कि इनका पद ख़त्म हो चुका है। सलीम अली की पत्नी के पास कुछ रुपये थे जिससे उन्होंने बंबई बन्दरगाह के पास किहिम नामक स्थान पर एक छोटा सा मकान ले लिया।

Dr Salim Ali the Birdman of India (डॉ सलीम अली, बर्डमैन ऑफ़ इंडिया)

डॉ सलीम अली का सम्पूर्ण जीवन पक्षियों के लिए समर्पित रहा है। ऐसा माना जाता है कि सलीम मोइज़ुद्दीन अब्दुल अली पक्षियों की ज़ुबान समझते थे।

पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियों के अध्ययन के लिए डॉ सलीम ने देश के अनेको स्थान और जंगलों का भ्रमण किया। डॉ सलीम ने कुमाऊँ के तराई क्षेत्र से विलुप्त घोषित हो चुकी बया पक्षी की एक प्रजाति ढूंढ़ निकाली। डॉ सलीम को साइबेरियाई सारसों की एक-एक आदत की बेहतर पहचान थी। उन्होंने ही अपने अध्ययन के माध्यम से बताया था कि साइबेरियन सारस मांसा नहीं खाते, बल्कि वे पानी के किनारे पर जमी काई खाते हैं। पक्षियों को बिना कष्ट पहुंचाए पकड़ने के लगभग 100 से भी ज़्यादा तरीक़े उनके पास थे। पक्षियों को पकड़ने के लिए डॉ सलीम अली ने प्रसिद्ध ‘गोंग एंड फायर’ व ‘डेक्कन विधि’ की खोज की थी, उक्त विधि को आज भी पक्षी विज्ञानियों द्वारा प्रयोग किया जाता है।

जर्मनी के ‘बर्लिन विश्वविद्यालय’ में उन्होंने प्रसिद्ध जीव वैज्ञानिक इरविन स्ट्रेसमैन के सानिध्य में काम किया। उसके बाद सन 1930 में वे भारत वापस आये और फिर पक्षियों के अध्ययन पर और तेजी से कार्य प्रारंभ किया। देश की आज़ादी के बाद डॉ सलीम अली ‘बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी’ (बीएनएसच) के प्रमुख लोगों में रहे। भरतपुर पक्षी विहार की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

Dr. Salim’s writing work. (डॉ सलीम अली का लेखन कार्य)

सन 1930 में सलीम अली ने अपनी खोज और अध्ययन पर आधारित लेख लिखे। इन लेखों के माध्यम से लोगों को उनके तथा उनके द्वारा किये जाने वाले कार्यों के विषय में पता चला और वे एक ‘पक्षी शास्त्री’ के रूप में जाने गये। छोटे लेखों  के साथ-साथ डॉ सलीम अली ने कुछ पुस्तकें भी लिखीं हैं। वे कई जगह जाकर पक्षियों के बारे में जानकारी एकत्र करते थे। उन्होंने इन एकत्र की हुई जानकारी तथा अपने अध्ययन व खोज के आधार पर  ‘द बुक ऑफ़ इंडियन बर्ड्स’ नमक पुस्तक लिखी जो सन 1941 में प्रकाशित हुई।  इसके बाद उन्होंने एक दूसरी पुस्तक ‘हैण्डबुक ऑफ़ द बर्ड्स ऑफ़ इंडिया एण्ड पाकिस्तान’ लिखी। इस पुस्तक मे सभी प्रकार के पक्षियों, उनके गुणों-अवगुणों, प्रवासी आदतों आदि से संबंधित अनेक रोचक और मतवपूर्ण जानकारियों का उल्लेख किया गया है। डॉ सलीम अली ने एक अन्य् पुस्तक ‘द फाल ऑफ़ ए स्पैरो’ भी लिखी, जिसमें उन्होंने अपने जीवन से जुड़ी कई घटनाओं का उल्लेख किया है।

Awards and Honors of Dr. Salim Ali (सम्मान और पुरस्कार)

डॉ सलीम अली को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया है। डॉ सलीम अली का प्रकृति विज्ञान और पक्षी विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके योगदान, समर्पण और किये गए विशिष्ट कार्यों के फलस्वरूप उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है तथा उनके महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा उन्हें सन 1958 में पद्म भूषण व 1976 में पद्म विभूषण जैसे महत्वपूर्ण नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया गया है।

Death of Dr Salim Ali (डॉ सलीम अली का निधन)

डॉ सलीम अली का निधन 20 जून को 91 साल की उम्र में मुंबई में हुआ।

Dr Salim Ali’s wish (डॉ सलीम अली की इक्षा)

डॉ सलीम अली भारत में एक ‘पक्षी अध्ययन व शोध केन्द्र’ की स्थापना करना चाहते थे। इनके महत्वपूर्ण कार्यों और प्रकृति विज्ञान और पक्षी विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के मद्देनजर ‘बॉम्बे नैचुरल हिस्ट्री सोसाइटी’ और ‘पर्यावरण एवं वन मंत्रालय’ द्वारा कोयम्बटूर के निकट ‘अनाइकट्टी’ नामक स्थान पर ‘सलीम अली पक्षीविज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केन्द्र’ स्थापित किया गया है।

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